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अभी तो यह अंगडाई है, आगे और लडाई है

ब्लॉ.ललित शर्मा, सोमवार, २९ अगस्त २०११

 

किसी को ना हो सका इसके कद का अंदाजा
आसमान है यह सर झुकाए बैठा है………
रात को बादल गरज रहे थे, बिजलियाँ चमक रही थी. बादलों की गड़गड़ाहट कुछ अधिक शोर कर रही थी, जैसे बादलों में युद्ध हो रहा हो अपनी-अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए. बादलों के बीच नहीं, लेकिन संसद में अवश्य जन विश्वास कायम रखने की लडाई चल रही थी. भारत का नया इतिहास लिखा जा रहा था. एक फक्कड़ फकीर के ललकार से कानून बनाने पर सहमति हो रही थी. मुसलाधार बरसात होने लगी. तभी समाचार मिला कि फकीर की बात मान ली गई. सत्य कभी पराजित नहीं होता यह एक बार फिर सिद्ध हो गया. सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, का उपदेश भारतीय दर्शन ने दिया है और यह प्रत्येक काल में कसौटी पर खरा उतरा है. अगर इतिहास के पन्ने पलटे जाएँ तो दृष्टिगोचर होता है कि किसी भी क्रांति का नेतृत्व जमीन से जुड़े आदमी ने ही किया है और उसे सफल बनाया है. सत्य हलाकान परेशान होता है पर पराजित नहीं होता. असत्य कभी विजयी नहीं होता. दमन की उमर कम होती है. एक दिन उसे आत्म समर्पण करना ही पड़ता है. अन्ना के नेतृत्व में देश का आत्मबल परीक्षा में खरा उतरा. दूसरी आजादी की लडाई में एक कदम आगे बढे हैं. 16 अगस्त से प्रारंभ हुयी लडाई अभी ख़त्म नहीं हुयी है. अभी इसे आगे भी चलना है. जब तक देश का प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों के प्रति सजग ना हो जाये, तब तक आजादी की दूसरी लडाई जारी रहेगी.
आजादी के बाद से लेकर आज तक हम अपने वोट से सरकार चुनते आये हैं. अपनी बात कहने के लिए प्रतिनिधि विधानसभा एवं लोकसभा में भेजते हैं. प्रतिनिधि चयनित होते ही ये व्यवहार बदलकर जनता के सेवक से जनता के मालिक बन जाते हैं. आम आदमी इसे ही अपनी नियति समझ कर  अपने भाग्य को कोसता रहता है. राजनैतिक पार्टियाँ चुनाव के समय ऐसे उम्मीदवारों की तलाश करती हैं जो धन से मजबूत हो. चुनाव में अधिक से अधिक धन खर्च कर सके. वोट खरीदने के बाद जन-धन को लूटना इनका अधिकार बन जाता है. साम-दाम-दंड-भेद सब लगा दिए जाते हैं चुनाव जीतने के लिए. व्यवस्था भी इन्होने अपने हिसाब से बदल ली, अगर किसी मतदाता के पास 10,000 रूपये नहीं है तो वह प्रत्याशी नहीं बन सकता. कुल मिलाकर धनवानों का ही पक्ष मजबूत है. भ्रष्ट्राचार इतना अधिक बढ़ गया कि आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है. आम जन अगले ५ बरस का चुनाव का इंतजार करता है, जिससे वह प्रतिनिधि एवं सरकार बदल सके. अब देश में बदलाव की बयार आ गई, जनता अपने अधिकारों के प्रति अन्ना के सार्थक प्रयास से जागरूक हो रही है.
सेवक जब मालिक का व्यवहार करने लगे, आम मुख्तियार ही मालिक बन जाये तब असली मालिक को जागना ही पड़ता है. बाड़ ही खेत खाने लगी. ऊँचे स्तर पर हो रहे भ्रष्ट्राचार की खबर आम आदमी तक नहीं पहुचती. पर निचले स्तर पर छोटे-छोटे कार्यों के लिए पैसे देना उसे नागवार गुजरता है. आज जनता के दबाव ने दिल्ली को भ्रष्ट्राचार के खिलाफ कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया. सभी जानते हैं कि एक बिल पास कर संस्था के गठन से भ्रष्ट्राचार समाप्त नहीं हो जायेगा. इसके लिए नागरिकों को भी अपने कर्तव्यों ध्यान रखना पड़ेगा. संकल्प लेना पड़ेगा कि स्वयं भ्रष्ट्राचार को बढ़ावा नहीं देंगे, न किसी से रिश्वत लेंगे न किसी को रिश्वत देंगे.भ्रष्ट्राचरण के विरुद्ध सतत आन्दोलन जारी रखना पड़ेगा. तभी भ्रष्ट्राचार रूपी दानव से पार पाया जा सकता है. भ्रष्ट्राचार से अमीरी और गरीबी के बीच गहरी खाई का निर्माण हो चूका है. अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब और भी गरीब.  एक तरफ अन्न गोदामों में सड़ रहा है, दूसरी तरफ गरीब दाने – दाने को मोहताज है. उड़ीसा के कोरापुट में गरीबी से त्रस्त होकर एक आदमी ने २० हजार में अपने बच्चे को बेच दिया. इस युग में भी ऐसे समाचार सामने आते हैं तो पीड़ा होती है.
अन्ना के आन्दोलन में सरकार ने रोड़े तो खूब अटकाए पर जन समर्थन साथ होने के कारण मुंह की खानी पड़ी. आन्दोलन के दौरान अन्ना को भगोड़ा तथा भ्रष्ट्राचारी तक कहा गया. लेकिन कहने वालों ने अपने गिरेबान में झांक कर नहीं देखा, जब देखा तो उसे अपने पर शर्म आई और माफ़ी मांगने लगा. हमने भी देखा बुद्ध के समक्ष अन्गुलिकमाल का ह्रदय परिवर्तन कैसे होता है. अन्ना को धराशायी करने के लिए उसके फ़ौज तक के रिकार्ड निकाल लिए. कहीं कोई कमजोरी तो मिले, जिसकी ढाल बना कर अन्ना का अनशन तुडवाया जा सके. इनका बस चलता तो चलता तो चित्रगुप्त से अन्ना के पूर्व जन्म के भी रिकार्ड मंगवा लेते. वाह अन्ना! आपने इनके लिए कुछ भी नहीं छोड़ा. जीवन की पवित्रता, सुचिता और पारदर्शिता काम आ गई. संसार में चरित्रवान ही सबसे उंचा स्थान ग्रहण करता है. कहा गया है कि निर्धन, धनवान से डरता है, मुरख, विद्वान से डरता है, निर्बल बलवान से डरता है, लेकिन धनवान, विद्वान्, बलवान ये तीनो चरित्रवान से डरते हैं. अन्ना ने इसे सिद्ध करके दिखा दिया. निष्कलंक जीवन जी कर विश्व के समक्ष एक आदर्श कायम कर दिया.
मंहगाई की चक्की में पिसता आम भारतीय कभी सोच भी नहीं सकता था कि कोई ऐसा नेतृत्त्व भी उसके लिए आएगा जो गरीबी-गरीबों एवं मंध्यम वर्ग के लिए सर्वाधिकार प्राप्त सत्ता से टकरा जायेगा. सत्ता भी सोच बैठी थी कि बाबा का हश्र देख कर तो कोई दूसरा दिल्ली को आँख दिखाने की हिम्मत कर बैठेगा. दिल्ली ने भी अन्ना के साथ बाबा जैसा ही व्यवहार किया. यहीं गलती हो गई. कहते हैं ना….. जात भी दी और जगात भी दी. जन आक्रोश के सामने कुछ नहीं टिकता. जेल से भी सादर छोड़ना पड़ा और रामलीला मैदान भी देना पड़ा. सत्ता पोषित कुछ लोग आग उगलते रहे. कुछ जयचंदों ने भी आन्दोलन में सेंध लगाने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो सके. देश के कोने-कोने से भ्रष्ट्राचार और मंहगाई के विरोध में उठे जनज्वार ने अपनी उपस्थिती मजबूती से दर्ज कर दी. इन्हें औकात दिखा दी. संसद में बिल पर बहस करनी पड़ी, अन्ना की तीन मांगों पर सहमती जतानी पड़ी. यह भारत के गणतंत्र के स्वर्णिम दिन था.

नक्कार खाने में तूती की आवाज कौन सुनता है? यह कहावत सदियों से कही जाती है, लेकिन अब वक्त आ गया, तूती की आवाज भी बुलंद हो चुकी है और उसे सुनना ही पड़ेगा. ये वही सांसद और विधायक हैं जो अपने वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव पर बहस नहीं करते और उसे सर्व सहमती पारित कर दिया जाता है. लेकिन जब आम आदमी के अधिकारों के से जुड़े प्रस्ताव आते हैं तो उन्हें या तो पेश नहीं किया जाता या उसके मुद्दे पर संसद में कई फाड़ दिखाई देने लगते हैं. आम जन से जुड़े हुए कई प्रस्ताव संसद में धूल खा रहे हैं. जिसमे महिला आरक्षण जैसा महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी है. जन लोकपाल पास करने पर दबाव बनते ही संसद में बैठे कई नेताओं को अभी से अपने जेल जाने डर सताने लगा है.  देश की जनता जाग चुकी है, वह दिन भी शीघ्र आएगा जब भ्रष्ट्राचारियों को जेल में बाकी जीवन बिताना पड़ेगा. जनता अपने खून-पसीने की कमाई की पाई-पाई का हिसाब लेगी. अपने चुने हुए जन प्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार जिस दिन जनता को प्राप्त हो जायेगा उस दिन आम आदमी को इनके दरबार में हाजिरी नहीं लगानी पड़ेगी, ये स्वयं चलकर उसके पास आयेंगे.
अन्ना के आन्दोलन का सकारात्मक पक्ष यह रहा कि इस आन्दोलन ने समस्त भारत को पुन: एक सूत्र में बाँध दिया. जे.पी. आन्दोलन के पश्चात् जन लोकपाल बिल के समर्थन में एक ऐसा आन्दोलन हुआ कि देश की जनता सड़कों पर आ गई. जिसमे बच्चे-बूढे-जवान, सभी धर्म, पंथों, एवं आधी आबादी महिलाon  ने भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई. एक दो छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़ कर कहीं से भी हिंसा का समाचार नहीं मिला. जबकि कुछ लोगों ने उत्पात करने की भरपूर कोशिश की. यह हमारी सामाजिक समरसता और लोकतंत्र की जीत है, आम आदमी की जीत है. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की जीत है. बाहर खड़े किसी आदमी ने आवाज लगायी और उसकी आवाज संसद के भीतर सुनी गयी. ये जनता की जीत है. इस आन्दोलन पर समूचे विश्व की निगाहें लगी हुयी थी. उन्हें भी इस सफल अहिंसात्मक आन्दोलन से सीख मिली कि भूखा रह कर बिना हथियार उठाये अपनी मांगे मनवाई जा सकती है. अब देश के नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए सतत जागना पड़ेगा. तभी हमारे कामयाब लोकतंत्र का लोहा समूचा विश्व मानेगा. अभी तो यह अंगडाई है, आगे और लडाई है.

 

COMMENTS :

27 टिप्पणियाँ to “अभी तो यह अंगडाई है, आगे और लडाई है…………. ललित शर्मा”

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ५:५८ पूर्वाह्न 
भविष्य में बहुत कुछ छिपा हुआ है? अब देखो किस की बारी है?

पत्रकार-अख्तर खान “अकेला” ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ६:४३ पूर्वाह्न 
is ldayi me angdaayi ke sath hm sabhi aapke saath hain lalit bhai .akhtar khan akela kota rajsthan

आशा ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ७:१२ पूर्वाह्न 
बहुत सार समेटे लेख |
आशा

वाणी गीत ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ८:०७ पूर्वाह्न 
जनता की यह एकजुटता बनी रहे तो कुछ भी असंभव नहीं !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ८:१५ पूर्वाह्न 
जन चेतना का विकास तो हुआ है।

दर्शन कौर’ दर्शी ‘ ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ८:२१ पूर्वाह्न 
आखिर सच की जीत हर युग में हुई हैं ….अब हमारा यह फर्ज बनता हैं की हम इसे कैसे संभल पाते है ..?

Surendra Singh Bhamboo ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ८:३७ पूर्वाह्न 
यह जनता की जीत है। लेकिन जनता को यह ध्यान भी रखना है कि आगे चुनाओं में सही व इमानदार व योग्य नेता ही चुने ताकि भ्रष्टाचार की जड़ ही न पनपे
ललीत जी बहुत ही अच्छे सार ग्रभीत लेख के लिए धन्यवाद

S.M.HABIB (Sanjay Mishra ‘Habib’) ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ८:५२ पूर्वाह्न 
शानदार आलेख भईया… बस एक ही प्रार्थना है कि अंगड़ाई लेता यह जनसैलाब पुनः ना सो जाए, बल्कि अंगड़ाई के बाद की अधिक महत्वपूर्ण लड़ाई के तैयार रहे… क्योंकि आगे कि लड़ाई स्वयम अपने आप से लडनी होगी… तभी किसी भी प्रकार का क़ानून सार्थक हो सकता है…
जयहिंद.

अशोक बजाज ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ९:१० पूर्वाह्न 
पठनीय व प्रशंसनीय पोस्ट .

पोला पर्व की बधाई .

Murari Pareek ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ १०:१३ पूर्वाह्न 
Badhai ho sabhi ko

Arunesh c dave ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ १०:२७ पूर्वाह्न 
जय अन्ना जी की गुरूदेव अभी तो अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है

anu ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ११:०७ पूर्वाह्न 
समस्त हिन्दुस्तान का एक सूत्र में बांध जाना ही संकेत है ……आने वाले वक़्त में अच्छा ही होगा ….इसका सारा श्रेय अन्ना जी को ही जाता है

vidhya ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ११:३२ पूर्वाह्न 
बहुत सार समेटे लेख |

संगीता पुरी ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ११:५३ पूर्वाह्न 
अभी तो यह अंगडाई है, आगे और लडाई है. 
एक एक पंक्तियों से सहमत .. बहुत सटीक और सार्थक लेख !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ १२:०४ अपराह्न 
आज 29 – 08 – 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है …..

…आज के कुछ खास चिट्ठे …आपकी नज़र .तेताला पर

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ १:१६ अपराह्न 
सारगर्भित लेख…

रेखा ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ २:०६ अपराह्न 
अभी तो आगे बहुत कुछ करना है …जिसके संकेत अन्नाजी ने अस्पताल जाते -जाते दे ही दिए हैं

संध्या शर्मा ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ २:२७ अपराह्न 
किसी को ना हो सका इसके कद का अंदाजा
आसमान है यह सर झुकाए बैठा है………
सब कुछ कह दिया आपने… वाह जवाब नहीं…

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ २:५३ अपराह्न 
इनका बस चलता तो चलता तो चित्रगुप्त से अन्ना के पूर्व जन्म के भी रिकार्ड मंगवा लेते. वाह अन्ना! आपने इनके लिए कुछ भी नहीं छोड़ा. जीवन की पवित्रता, सुचिता और पारदर्शिता काम आ गई. संसार में चरित्रवान ही सबसे उंचा स्थान ग्रहण करता है. कहा गया है कि निर्धन, धनवान से डरता है, मुरख, विद्वान से डरता है, निर्बल बलवान से डरता है, लेकिन धनवान, विद्वान्, बलवान ये तीनो चरित्रवान से डरते हैं. अन्ना ने इसे सिद्ध करके दिखा दिया. निष्कलंक जीवन जी कर विश्व के समक्ष एक आदर्श कायम कर दिया.

बहुत सारगर्भित लेख … अभी तो लड़ाई जारी है … और यह लड़ाई सरकार के साथ साथ स्वयं से भी है … बहुत बढ़िया पोस्ट

rashmi ravija ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ३:०८ अपराह्न 
बहुत ही गहन विवेचन….इस आन्दोलन से कुछ तो अच्छा निकल कर आएगा ही.

मदन शर्मा ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ७:०८ अपराह्न 
यह जनतंत्र की ही जीत है कि सरकार देर से ही सही, आखिरकार एक मजबूत लोकपाल के लिए अन्ना हजारे और उनके साथियों की तीन प्रमुख मांगों पर संसद के इसी सत्र में बहस कराने को तैयार हो गई है।

सुन्दर प्रेरक प्रस्तुति के लिए आभार

ajit gupta ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ७:३० अपराह्न 
बहुत अच्‍छा आलेख। आम आदमी की जीत की बधाई।

डॉ टी एस दराल ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ८:०८ अपराह्न 
अन्ना ने देश को एक कर दिया । अब तो सही मायने में लोकतंत्र आकर ही रहेगा ।

Atul Shrivastava ने कहा… 

on 

 २९ अगस्त २०११ ९:२३ अपराह्न 
अच्‍छा लेख।
इस आंदोलन ने देश में एकजुटता का अच्‍छा संकेत दिया……….
आभार आपका

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali ‘Rajnish’) ने कहा… 

on 

 ३० अगस्त २०११ ६:५१ पूर्वाह्न 
बिलकुल, यह लडाई जारी रहनी चाहिए।

——
कसौटी पर शिखा वार्ष्‍णेय..
फेसबुक पर वक्‍त की बर्बादी से बचने का तरीका।

डॉ.मीनाक्षी स्वामी ने कहा… 

on 

 ३० अगस्त २०११ १२:१३ अपराह्न 
जनमत में बहुत ताकत है, फिर साबित हो गया है। मगर आम जन को भी अपने स्वयं के स्तर पर स्वयं के द्वारा किये जाने वाले भ्रष्टाचार को छोडना होगा, तभी आंदोलन वास्तव में सफल होगा।

ताऊ रामपुरिया ने कहा… 

on 

 ३० अगस्त २०११ ४:२३ अपराह्न 
जनता जाग गई है इब.

रामराम

Read More: http://lalitdotcom.blogspot.com/2011/08/blog-post_29.html

अगस्त 30, 2011 at 3:43 अपराह्न टिप्पणी करे

अन्ना तुम संघर्ष करो…हम तुम्हारे साथ हैं

ब्लॉ.ललित शर्मा, शुक्रवार, २६ अगस्त २०११

 

रात को लिखने की तैयारी कर रहा था, तभी कम्प्यूटर अनशन पर चला गया. सोचा कि सुबह उठ कर मनाया जायेगा. सरकार तो अन्ना को नहीं मना सकी. हो सके तो मै कम्प्यूटर को मना लूँ. सुबह कम्प्यूटर को मनाने के लिए धुप दीप की तैयारी कर रहा था तभी बाल सखा रामजी  आ गए. “कहीं जाये के तैयारी हे का महाराज?”…..”हा हो रे भाई….  कम्प्यूटर नई मानत हे गा, शहर के हवा खवाए ला परही”. – मैंने जवाब दिया. उसने बताया कि आज नगर में अन्ना के समर्थन में रैली निकाली जा रही है. मुझे भी उसमे अपनी उपस्थिती दिखानी है. मैंने शहर जाने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया. कंप्यूटर तो अपना साथी है. एक दिन बाद मना लेंगे. अगर नगर के ईमानदार लोग रूठ गए तो भ्रष्ट लोगों में ही ताजिंदगी बैठना पड़ेगा. उसने बताया कि स्कुल के बच्चे भी रैली में शामिल होंगे.
भीड़ बढ़ाने के लिए स्कुल के बच्चों  से अच्छा उपाय कुछ नहीं है.अगर कोई नेता आता है तो स्कुल के बच्चों के हाथों में झंडियाँ देकर खड़े कर दो. भीड़ दिख जाएगी और नेता जी भी खुश हो जायेंगे. कोई रैली निकाले तो स्कुल के बच्चों को ले आओ. अपने गाँव-नगर के बच्चे हैं उन्हें इतना तो बलिदान करना ही पड़ेगा गाँव-नगर की इज्जत बचाने के लिए. अन्यथा कहा जाता है.-” देश धर्म के काम ना आये, वह बेकार जवानी है”. रैली निकल पड़ी, गाँव के कुछ बुद्धिजीवी किस्म के ईमानदार माने जाने वाले लोगों के साथ कुछ युवा भी थे. जोश से नारा लगा रहे थे -” देश की जनता त्रस्त है, जो अन्ना का साथ न दे वह भ्रष्ट है.”  अब कौन भ्रष्ट कहलाना चाहेगा. लोग रैली में साथ-साथ हो लिए. स्वस्फूर्त रैली निकली, कुछ लोग कह रहे थे. इस बार बिना बुलाये काफी लोग रैली में आ गए.हमने भी साथ-साथ नगर भ्रमण कर लोगों को जगाया और बहती गंगा में हाथ धो लिया. अगर कम्प्यूटर को मनाने चला जाता तो अन्ना समर्थन गंगा यूँ ही बह जाती और मैं ठगा सा रहा जाता.
रामजी ने बहुत बड़ा अहसान मेरे पर किया. इस अहसान को मेरी कई पुश्ते नहीं भूलेंगी. क्योंकि आज़ादी की दूसरी लडाई चल रही है, काले अंग्रेजों को देश से बाहर भगाना है. मेहतरू जी का कहना था कि इन्हें देश से बाहर भगाने में  प्रत्येक नागरिक का योगदान होना चाहिए. वह भी अपनी पान की दुकान में बेटे को बैठा कर आया था. देश से भ्रष्ट्राचार मिटाना है तो यह त्याग जरुरी हो जाता है. रैली में चलते हुए सोच रहा था कि जब अंग्रेजों को भगाया होगा तो ऐसे  ही रैली निकाली जाती होगी. लोगों के नाम दर्ज किये जाते होंगे. कौन-कौन और कितने लोग रैली एवं प्रदर्शन में थे? तभी तो आज़ादी के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पहचान हुयी होगी और पेंशन बनी होगी. मेरे दादा-परदादा रैली प्रदर्शन में जरुर रहे होंगे, लेकिन नाम दर्ज कराने की जहमत नहीं उठाई होगी. अन्यथा वे भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होते. हां पिताजी ने फ़ौज की सेवा में रहते हुए कई मेडल प्राप्त किये. अगर वे भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होते तो दो-तीन पेंशन अम्मा को जरुर मिलती. इसलिए मैंने आज रैली में हाजिरी दर्ज कराने की ठान ली. अगर कहीं नाम नहीं लिखाया तो द्वितीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पेंशन से वंचित रह जाऊंगा.
कई आन्दोलनकारियों ने अन्ना टोपी लगा रखी थी. मेरे जैसे कई लोगों के पास टोपी नहीं थी. कहने लगे बिना टोपी के समर्थन नहीं माना जायेगा. अब टोपी कहाँ से लायी जाये? पता चला कि टोपी गाँव में ही मिल रही है. एक दुकान में दुप्प्ली टोपी २० रुपये की मिल रही थी, दूसरी दुकान में १५ रूपये की. रामजी दुकानदार पर भड़क गए, कहने लगे तुम दिन दहाड़े ५ रूपये का भ्रष्ट्राचार कर रहे हो. मैंने उन्हें समझाया कि – यही तो व्यापार है, व्यापारी अगर मौके का फायदा उठा कर अधिक मुनाफा नहीं कमाएगा तो चंदा कहाँ से देगा? किसी भी आन्दोलन को चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है और धन सिर्फ व्यापारी ही दे सकता है. रामजी ने टोपी खरीद ली और शान से धारण कर ली. टोपी ने रैली में रौनक बढा दी. एक बात तो माननी पड़ेगी, अन्ना ने गाँधी टोपी का खोया हुआ सम्मान वापस दिला दिया. गाँव में भी टोपियाँ बिकने लगी. नौजवानों को नया फैशन मिल गया. “सर पर टोपी हाथ में मोबाईल ओ तेरे क्या कहने”. रैली पुरे शबाब पर थी. नारों से आसमान गूंज रहा था. नगर भ्रमण कर रैली बस स्टैंड पहुच गई.
बस स्टैंड में माइक लाउड स्पीकर की देश भक्ति के गीत बज  रहे थे. होश सँभालने के बाद मैंने पहली बार १५ अगस्त और २६ जनवरी को छोड़ कर किसी और दिन देश भक्ति के गाने बजते देखे. वातावरण देश भक्तिमय हो गया. कुछ नेता कुर्सियों पर विराजमान थे. भाषण बाजी का दौर शुरू हुआ. नगर पंचायत अध्यक्ष के भाषण से सभा की शुरुवात हुयी. उन्होंने अपना समर्थन अन्ना को दिया और कहा कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह आजादी की दूसरी लडाई में सम्मिलित हो. व्यापारी अपनी दुकानों में धंधा करते हुए भाषण सुन रहे थे. गुरूजी बोले-“हमारे गाँव में तो परसों सारे लोग कार्यक्रम में शामिल हुए थे. आपके गाँव में ऐसा नहीं दिख रहा है”. मैंने कहा कि – “इनका अन्ना को नैतिक समर्थन है. दुकान से उनका समर्थन अन्ना को मिल रहा है. वे धंधा करते हुए गायत्री मन्त्र का जाप कर रहे हैं, जिससे दिल्ली में अनशन पर बैठे अन्ना को मन्त्र की शक्तियों से बल मिल रहा है. मंत्र शक्ति के प्रताप से ही अन्ना १० दिनों से बिना आहार ग्रहण किये अनशन पर हैं”. तभी माइक से पीत वस्त्रधारी सज्जन ने एलान किया – “जो धरना स्थल पर नहीं पहुच पाए है, उन भाइयों एवं बहनों से निवेदन है कि अपने स्थान से ही गायत्री मन्त्र का जाप करें. मंत्र शक्ति से आपका समर्थन अन्ना तक पहुँच जायेगा.”
तभी दो देश भक्त नागरिकों का धरना स्थल पर आगमन हुआ. उन्होंने हिलते-डुलते अपने चप्पल निकाले और दरी पर स्थान ग्रहण किया. भाषण के बीचे में हाथ इस तरह हिलाते थे जैसे मुजरा सुन रहे हों. एक ने भाषण देने वाले की तरफ इशारा करके कहा-” जोर से बोलो, कम सुनाई दे रहा है. वन्दे मातरम्, जय भारत”. दुसरा दांत निपोर रहा था. तभी उसके तहमद से दारू की बोतल निकल कर गिर गई. उसने हाथ जोड़ कर बोतल उठाई और फिर तहमद में खोंस ली. “जय भारत माता की. अन्ना तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं”. दोनों अनशन की पूरी तैयारी से आये थे. पहले वाला उठा और उसने तिरंगे झंडे को नमन कर चल पड़ा भट्ठी की ओर, दूसरा भी उसके पीछे पीछे निकल लिया. इसके बाद हमारा भी भाषण हुआ, कुछ पत्रकार भी धरना स्थल की नाप-जोख कर रहे थे. अब हमारा नाम भी पक्के में दर्ज हो जायेगा, सुबह के अख़बारों में नाम छपने से. हाजरी रजिस्टर भी आ चूका था. दुसरे नंबर पर हमने अपना नाम लिख कर हस्ताक्षर किया इस ताकीद के साथ कि इसकी एक प्रति हमें भी उपलब्ध करायी जाये, पेंशन के लिए राजनीति हुयी तो प्रमाण पेश कर सकेंगे. अन्ना को समर्थन देकर चल पड़े घर की ओर………  अन्ना तुम संघर्ष करो…हम तुम्हारे साथ हैं.

 

COMMENTS :

28 टिप्पणियाँ to “अन्ना तुम संघर्ष करो…हम तुम्हारे साथ हैं.———– ललित शर्मा”

अनूप शुक्ल ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ७:३७ पूर्वाह्न 
दुसरा दांत निपोर रहा था. तभी उसके तहमद से दारू की बोतल निकल कर गिर गई. उसने हाथ जोड़ कर बोतल उठाई और फिर तहमद में खोंस ली.

गजब!

Rahul Singh ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ७:४८ पूर्वाह्न 
खरी-खरी.

सतीश सक्सेना ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ७:५७ पूर्वाह्न 
अन्ना तुम संघर्ष करो…हम तुम्हारे साथ हैं !

वाणी गीत ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ८:१९ पूर्वाह्न 
भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में घुस आये ऐसे ही लोगों ने वास्तविक लाभ लिया आज़ादी का, मगर सिर्फ इस भय से संघर्ष ही नहीं किया जाये , ये भी उचित नहीं …यह सतर्कता तो रखनी ही होगी कि आन्दोलन व्यर्थ स्वार्थ सिद्धि करने वाले लोगों के हाथ की कठपुतली ना बन जाये!

अशोक बजाज ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ८:२७ पूर्वाह्न 
सबको पेंशन का टेंशन है .

याज्ञवल्‍क्‍य ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ९:२१ पूर्वाह्न 
सही चित्रण

Murari Pareek ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ९:२५ पूर्वाह्न 
ha..ha.. daru ki botal khise se nikalte hi jay bharat anna tum sangharsh karo ham tumhaare sath hai puri taiyaari ke !!

दीपक बाबा ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ९:४८ पूर्वाह्न 
दुसरा दांत निपोर रहा था. तभी उसके तहमद से दारू की बोतल निकल कर गिर गई. उसने हाथ जोड़ कर बोतल उठाई और फिर तहमद में खोंस ली.

पंडित जी, ये ऐसा लग रहा है ….. हमारे चौक का वाकया लिख दिया है
मस्त… एकदम.

संगीता पुरी ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ १०:४० पूर्वाह्न 
आओ हम संघर्ष करें.. अन्‍ना हमारे साथ हैं !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ १२:०३ अपराह्न 
कटाक्ष से भरपूर रोचक संस्मरण ..

Arunesh c dave ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ १:३३ अपराह्न 
मोर नाम घलो नोट नई करा दे्ना रहिस जी लागथे दूसर गुरू खोजे ल पड़ही

Suresh kumar ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ २:३१ अपराह्न 
आज कल बिलकुल ऐसा ही हो रहा है कुछ लोगो पर गहरा कटाक्ष किया है आपने …..

S.M.HABIB (Sanjay Mishra ‘Habib’) ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ २:३१ अपराह्न 
सरकार कस तहूँ हर अपन कम्यूटर के अनशन ल टोराय बर भिड तभे बनही भई…

संध्या शर्मा ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ३:२१ अपराह्न 
नौजवानों को नया फैशन मिल गया. “सर पर टोपी हाथ में मोबाईल ओ तेरे क्या कहने”…
बिलकुल ऐसा ही हो रहा है…गहरा कटाक्ष

रेखा ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ३:४६ अपराह्न 
अन्ना को ही नहीं ,हमसब को संघर्ष करना होगा …….तभी बदलाव हो सकता है

NEELKAMAL VAISHNAW ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ६:३२ अपराह्न 
बहुत खूब लाजावाब लिखा है आपने बधाई स्वीकारें
हमारे भी तरफ आने का कष्ट करेंगे अगर समय की पाबंदी न हो तो आकर हमारा उत्साहवर्धन के साथ आपका सानिध्य का अवसर दे तो हमें भी बहुत ख़ुशी महसूस होगी…..
MITRA-MADHUR 
MADHUR VAANI 
BINDAAS_BAATEN

ताऊ रामपुरिया ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ६:५८ अपराह्न 
ये तो सबको खेम्च खेंच कर सोटे मारे हैं भाई. बहुत सटीक.

रामराम.

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ७:३२ अपराह्न 
सारा देश एकजुट है, अन्ना के साथ है। उधर अभी भी कुछ लोग ओछी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं, उन्हें अभी भी अक्ल नहीं आई है। कल रात राम-लीला मैदान के बाहर हुड़दंग मचाया या मचवाया गया।

डॉ.मीनाक्षी स्वामी ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ १०:२३ अपराह्न 
लाजवाब कटाक्ष
बहुत खूब !

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ११:२१ अपराह्न 
प्रचार माध्यम से कम से कम लोगों को एकजुटता कायम करने की सूझी। लेकिन अब जो अप्रत्याशित घटनायें होने लगी हैं उस पर रोक लगना चाहिये तभी अन्नाजी का यह व्रत फलीभूत होगा……और सबसे बड़ी बात प्रत्येक व्यक्ति को मसलन भ्रष्ट अधिकारी/कर्मचारी से लेकर प्रलोभन देने वालों (आज देश के प्रमुख कर्णधार बड़े बड़े उद्योगपति अमीर लोगों) को भी कटिबद्ध होकर अमल मे लाना होगा।

Rahul Singh ने कहा… 

on 

 २७ अगस्त २०११ ६:०७ पूर्वाह्न 
अन्‍ना हजारे ने कहा कि देश में जनतंत्र की हत्‍या की जा रही है और भ्रष्‍ट सरकार की बलि ली जाएगी। यानि खून के बदले खून?

दर्शन कौर’ दर्शी ‘ ने कहा… 

on 

 २७ अगस्त २०११ १:२३ अपराह्न 
अजी ,हम भी आपके साथ हैं …पलटकर देखलो .:)

प्रवीण पाण्डेय ने कहा… 

on 

 २७ अगस्त २०११ २:५९ अपराह्न 
निष्कर्ष सुखद ही होंगे।

Atul Shrivastava ने कहा… 

on 

 २७ अगस्त २०११ ११:०७ अपराह्न 
हर जगह अन्‍ना की आंधी है।
इस बार यह अच्‍छा संकेत है कि जिस युवा पीढी को लोग भटका हुआ बताते हैं वो युवा पीढी पूरी तल्‍लीनता से और अनुशासन के साथ अन्‍ना के आंदोलन में शामिल हुई।
देश के लिए यह अच्‍छी बात है।

Rakesh Kumar ने कहा… 

on 

 २८ अगस्त २०११ ९:१२ पूर्वाह्न 
कमाल है जी कमाल
नई पुरानी हलचल से यहाँ आये.
अब आपने अन्ना जी के अनशन को तोड़ने की
सब तैय्यारी कर ली है,चलिए चलते हैं रामलीला मैदान.

हम भी आपके साथ हैं.

मेरे ब्लॉग पर भी तशरीफ लाईयेगा.

mahendra verma ने कहा… 

on 

 २८ अगस्त २०११ ६:२४ अपराह्न 
सारा देश अन्नामय हो गया है।
रामदेव को अन्ना के अनशन से सीख लेनी चाहिए।

लेख के बीच-बीच में चुटकी जोरदार है।

केवल राम : ने कहा… 

on 

 २८ अगस्त २०११ ९:४६ अपराह्न 
भाई क्या बात है ….करारा मारा है …..राम राम

Swarajya karun ने कहा… 

on 

 २८ अगस्त २०११ १०:०८ अपराह्न 
दिलचस्प लगी ये पंक्तियाँ –”एक दुकान में दुप्प्ली टोपी २० रुपये की मिल रही थी, दूसरी दुकान में १५ रूपये की. रामजी दुकानदार पर भड़क गए, कहने लगे तुम दिन दहाड़े ५ रूपये का भ्रष्ट्राचार कर रहे हो. मैंने उन्हें समझाया कि – यही तो व्यापार है, व्यापारी अगर मौके का फायदा उठा कर अधिक मुनाफा नहीं कमाएगा तो चंदा कहाँ से देगा? किसी भी आन्दोलन को चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है और धन सिर्फ व्यापारी ही दे सकता है.”
भाई साहब ! किसी भी कार्यक्रम का बारीकी से अवलोकन और बाद में उसका लगभग यथावत चित्रण आपके आलेखों की एक बड़ी विशेषता है. इस रोचक आलेख के लिए बधाई और आभार.

Read More: http://lalitdotcom.blogspot.com/2011/08/blog-post_26.html

अगस्त 30, 2011 at 3:41 अपराह्न टिप्पणी करे

बेटी की किलकारी — श्रुति का जन्म दिन

ब्लॉ.ललित शर्मा, बृहस्पतिवार, २५ अगस्त २०११

 

कल मेरी पुत्री श्रुतिप्रिया का जन्म दिन था और बचपन के दोस्त कंवर लाल गाँधी की बहुत याद आ रही थी. तीन साल पहले मैं उसके गाँव गया. जोधपुर से डेचू और डेचू से चलकर बाप तहसील में कुशलावा उसका गाँव है. मेरे अचानक पहुचने पर वह बहुत खुश हुआ. उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि मैं उसके गाँव तक पहुच सकता हूँ. बस उसे तो यही लगी रही कि कहाँ बैठों और क्या खिलाऊं. मैं उसे मना करता रहा और वह मनुहार करता रहा. बरसों के बाद दोनों मिले थे.खूब बातें हुयी,  थोड़ी देर बाद वह उठा और एक अख़बार का फटा हुआ पन्ना लेकर आया, जिसे उसने जतन से संभाल रखा था. उसमे एक कविता थी. जिसे मुझे पढ़ कर सुनाया. मैंने उसे वह कविता लिख कर देने को कहा. उसने मुझे कविता लिख दी.
कल पुराने पैड के भीतर से वह पन्ना गिरा. कंवरिया की यादों ने मुझे घेर लिया. तुरंत उसे फोन लगाया और बात की. उसने पूछा कि आज कैसे याद आई? मैंने नहीं बताया. हाल-चाल और खैरियत लेकर फोन काट दिया. श्रुति के जन्मदिन पर वह कविता प्रस्तुत है. इसके रचयिता का नाम मुझे पता नहीं. किसी को पता हो तो  अवश्य बताएं. उनका नाम एवं लिंक दिया जायेगा…..
कन्या भ्रूण अगर मारोगे, माँ दुर्गा का श्राप लगेगा.
बेटी की किलकारी के बिन, आँगन-आँगन नहीं रहेगा
जिस घर बेटी जन्म न लेती, वह घर सभ्य नहीं होता
बेटी के आरतिए के बिन, पावन यज्ञ नहीं होता है.
यज्ञ   बिना बादल रुठेंगे, सूखेगी वर्षा की रिमझिम
बेटी की पायल के स्वर बिन, सावन-सावन नहीं रहेगा

आँगन-आँगन नहीं रहेगा, आँगन-आँगन नहीं रहेगा

जिस घर बेटी जन्म न लेती, उस घर कलियाँ झर जाती हैं.
खुशबु निर्वासित हो जाती ,गोपी गीत नहीं गाती हैं.
गीत बिना बंशी चुप होगी, कान्हा नाच नहीं पायेगा.
बिन राधा के रस न होगा, मधुबन मधुबन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन  नहीं रहेगा
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उस घर घड़े रीत जाते हैं
अन्नपूर्ण अन्न न देती, दुरभिक्षों के दिन आते हैं
बिन बेटी के भोर अलूणी,थका थका दिन साँझ बिहूणी
बेटी बिना न रोटी होगी, प्राशन प्राशन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन  नहीं रहेगा
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसको लक्ष्मी कभी न वरती
भव सागर के भंवर जाल में, उसकी नौका कभी न  तरती
बेटी के आशीषों में ही, बैकुंठों का बासा होता
बेटी के बिन किसी भाल का, चन्दन चन्दन नही रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन  नहीं रहेगा
जिस घर बेटी जन्म न लेती, राखी का त्यौहार न होगा
बिना रक्षा बंधन भैया का, ममतामय संसार न होगा
भाषा का पहला सवार बेटी, शब्द शब्द में आखर बेटी
बिन बेटी के जगत न होगा, सर्जन सर्जन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन  नहीं रहेगा
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसका निष्फल हर आयोजन
सब रिश्ते नीरस हो जाते, अर्थहीन सारे संबोधन
मिलना-जुलना आना-जाना, यह समाज का ताना बाना
बिन बेटी कैसे अभिवादन, वंदन वंदन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन  नहीं रहेगा

NH-30 सड़क गंगा की सैर

 

COMMENTS :

30 टिप्पणियाँ to “बेटी की किलकारी — श्रुति का जन्म दिन—–ललित शर्मा”

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ६:०३ पूर्वाह्न 
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसका निष्फल हर आयोजन
सब रिश्ते नीरस हो जाते, अर्थहीन सारे संबोधन
जी हाँ ..सच है….
जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनायें बिटिया को..

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ६:२५ पूर्वाह्न 
शुभकामनाएँ

मदन शर्मा ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ६:४४ पूर्वाह्न 
देश के कार्य में अति व्यस्त होने के कारण एक लम्बे अंतराल के बाद आप के ब्लाग पे आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ

बिन बेटी कैसे अभिवादन, वंदन वंदन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन नहीं रहेगा

वाहबहुत सुंदर रचना.!!!!!!
आपका बहुत बहुत आभार!!

भारतीय नागरिक – Indian Citizen ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ६:५१ पूर्वाह्न 
कविता की एक एक पंक्ति बढ़िया है और सही है. जन्मदिन की बधाई…

वाणी गीत ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ७:२३ पूर्वाह्न 
यह तो सच है कि बेटियां घर की रौनक होती हैं!
प्रेरक गीत !
श्रुति को जन्मदिन की बहुत शुभकामनयें और आशीष!

: केवल राम : ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ७:३५ पूर्वाह्न 
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसका निष्फल हर आयोजन
सब रिश्ते नीरस हो जाते, अर्थहीन सारे संबोधन

वर्तमान स्थिति में यह पंक्तियाँ सोचने पर मजबूर करती हैं …!
श्रुतिप्रिया जी को जम्दीन कि हार्दिक बधाई …..!

Ratan Singh Shekhawat ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ७:४५ पूर्वाह्न 
जिसने भी इस कविता की रचना कि शानदार की|

way4host

-सर्जना शर्मा- ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ८:१६ पूर्वाह्न 
श्रुति के जन्म दिन पर बहुत बहुत बधाई ष कविता जिसने भी लिखी बहुत सुंदर ही भावविभोर कर देने वाली है । खानदान की रौनक लड़की, खानदान की इज्ज़त लड़की लेकिन जब वो पैदा होती क्यों मातम सा छा जाता है । क्यों मुखड़ा कुम्लाह जाता है । दिल से बेटियों का स्वागत करने की ज़रूरत है ।

Archana ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ८:४४ पूर्वाह्न 
बहुत अच्छी रचना…बेटी अब विदा होने वाली है ..मन भर आया है पढ़्कर…
श्रुतिप्रिया को आशीष व जन्मदिन की बधाई …

सतीश सक्सेना ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ९:२१ पूर्वाह्न 
सस्नेह आशीर्वाद बिटिया के लिए ….

संगीता पुरी ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ९:४० पूर्वाह्न 
बहुत सुंदर कविता .. बिटिया को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं !!

संध्या शर्मा ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १०:१५ पूर्वाह्न 
बिन बेटी के जगत न होगा, सर्जन सर्जन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन नहीं रहेगा …
सबसे पहले तो श्रुति के जन्म दिन पर बहुत बहुत शुभकामनायें और ढेर सारा स्नेह…
ये कविता जिन्होंने भी लिखी है, बहुत अच्छी लिखी है.. भावुक कर दिया इस रचना ने.. बेटियां होती ही ऐसी हैं…

Surendra Singh Bhamboo ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १०:२० पूर्वाह्न 
बिटिया को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं
बहुत सुंदर कविता

दर्शन कौर’ दर्शी ‘ ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ११:३० पूर्वाह्न 
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसका निष्फल हर आयोजन
सब रिश्ते नीरस हो जाते, अर्थहीन सारे संबोधन
मिलना-जुलना आना-जाना, यह समाज का ताना बाना
बिन बेटी कैसे अभिवादन, वंदन वंदन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन नहीं रहेगा

बेटियां हर घर की रौनक होती हैं जहाँ बेटियां नहीं होती वो घर, घर नहीं होता ? जब विदा होकर वो दुसरे घर जाती हैं तो इस घर के साथ -साथ वो उस घर को भी गुलजार करती हैं ..

असमय बेटी का बिछोह एक भुक्त भोगी ही जान सकता हैं…?

दीपक बाबा ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ११:३७ पूर्वाह्न 
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसका निष्फल हर आयोजन
सब रिश्ते नीरस हो जाते, अर्थहीन सारे संबोधन

नारायण भूषणिया ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १२:१० अपराह्न 
बड़े पुन्य से घर में बेटी का जन्म होता है.श्रुतिप्रिया को जन्म दिन की अशेष शुभकामनाएं – आशीर्वाद .
नारायण भूषणिया

anu ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १२:४९ अपराह्न 
बेटी श्रुति को जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई …

बेटियों पर मेरी एक छोटी सी कविता

अजन्मी बच्ची की पुकार ………
ओह माँ ..क्यूँ तू ही मेरी दुश्मन बनी
क्यूँ तू खुद को ही मारने चली …
किया तुने एक घर को रोशन
माँ तुम्हारी ने …
एक बंश बेल को बढने दिया …
फिर क्यूँ ….
तुमने मेरी बलि दे डाली ??
क्यों नहीं सुनी तुमने
अपने दिल की आवाज़
ओह माँ … माँ
क्यूँ तूने मुझे जन्म
नहीं लेने दिया…
(.अनु..)

Suresh kumar ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १:०४ अपराह्न 
बहुत सुंदर और लाजवाब कविता .. बिटिया को जन्म दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं !!

डॉ टी एस दराल ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १:११ अपराह्न 
किसी ने कहा था –जिस घर में बेटी नहीं , वह घर घर नहीं शमशान है .
न भी हो , लेकिन बिन बेटी घर में रौनक भी नहीं होती .

श्रुतिप्रिया बिटिया को जन्मदिन की बहुत बधाई और शुभकामनायें .

प्रवीण पाण्डेय ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ २:२५ अपराह्न 
बहुत ही आत्मीय अभिव्यक्ति। बिटिया को शुभकामनायें।

Apanatva ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ३:०३ अपराह्न 
आशीर्वाद बिटिया के लिए ….
बहुत सुंदर कविता

रेखा ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ३:२९ अपराह्न 
श्रुति को जन्मदिन की ढेर सारी बधाई …..

Er. सत्यम शिवम ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ३:३५ अपराह्न 
many many happy returns of the day dear shruti:)

S.M.HABIB (Sanjay Mishra ‘Habib’) ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ४:५२ अपराह्न 
बहुत सुन्दर कविता….
श्रुति को जन्म दिन की सप्रेम बधाई….

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ७:४८ अपराह्न 
बिटिया को जन्मदिन के ढेरों आशीष!!
कविता के लिए धन्यवाद.. कविता दिल को छूती है, झकझोरती है, सवाल पूछती है!!

अशोक बजाज ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १०:४८ अपराह्न 
बेटियां तो हर घर की शान होती है ,
बेटियां तो खुशियों की खान होती है ,
बेटियां तो नूर-ए-जहान होती है ;
जन्म से पहले इन्हें मत मरो ,
बेटियां ईश्वर की वरदान होती है ;

श्रुतिप्रिया को जन्म दिन की बधाई एवं शुभकामनाएं !

डॉ.मीनाक्षी स्वामी ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ १०:५३ अपराह्न 
प्रिय श्रुतिप्रिया को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं । भावपूर्ण कविता !

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ११:०७ अपराह्न 
प्रिय श्रुतिप्रिया को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं, शुभाशीष्।
विलंब शुभकामना के लिये खेद! क्या होगा हमारे स्वास्थ्य का। फिर घेर लिया है सर्दी खांसी हरारत्……पहुंचा हूं आज और कुछ घंटे पहले

Atul Shrivastava ने कहा… 

on 

 २७ अगस्त २०११ ११:०३ अपराह्न 
बिटिया को जन्‍मदिन की शुभकामनाएं…………..

Swarajya karun ने कहा… 

on 

 २८ अगस्त २०११ १०:१२ अपराह्न 
बिटिया को बहुत-बहुत आशीर्वाद. अज्ञात कवि की ह्रदयस्पर्शी कविता की सार्थक प्रस्तुति के लिए आभार.

Read More: http://lalitdotcom.blogspot.com/2011/08/blog-post_25.html

अगस्त 30, 2011 at 3:38 अपराह्न टिप्पणी करे

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