बेटी की किलकारी — श्रुति का जन्म दिन

अगस्त 30, 2011 at 3:38 अपराह्न टिप्पणी करे

ब्लॉ.ललित शर्मा, बृहस्पतिवार, २५ अगस्त २०११

 

कल मेरी पुत्री श्रुतिप्रिया का जन्म दिन था और बचपन के दोस्त कंवर लाल गाँधी की बहुत याद आ रही थी. तीन साल पहले मैं उसके गाँव गया. जोधपुर से डेचू और डेचू से चलकर बाप तहसील में कुशलावा उसका गाँव है. मेरे अचानक पहुचने पर वह बहुत खुश हुआ. उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि मैं उसके गाँव तक पहुच सकता हूँ. बस उसे तो यही लगी रही कि कहाँ बैठों और क्या खिलाऊं. मैं उसे मना करता रहा और वह मनुहार करता रहा. बरसों के बाद दोनों मिले थे.खूब बातें हुयी,  थोड़ी देर बाद वह उठा और एक अख़बार का फटा हुआ पन्ना लेकर आया, जिसे उसने जतन से संभाल रखा था. उसमे एक कविता थी. जिसे मुझे पढ़ कर सुनाया. मैंने उसे वह कविता लिख कर देने को कहा. उसने मुझे कविता लिख दी.
कल पुराने पैड के भीतर से वह पन्ना गिरा. कंवरिया की यादों ने मुझे घेर लिया. तुरंत उसे फोन लगाया और बात की. उसने पूछा कि आज कैसे याद आई? मैंने नहीं बताया. हाल-चाल और खैरियत लेकर फोन काट दिया. श्रुति के जन्मदिन पर वह कविता प्रस्तुत है. इसके रचयिता का नाम मुझे पता नहीं. किसी को पता हो तो  अवश्य बताएं. उनका नाम एवं लिंक दिया जायेगा…..
कन्या भ्रूण अगर मारोगे, माँ दुर्गा का श्राप लगेगा.
बेटी की किलकारी के बिन, आँगन-आँगन नहीं रहेगा
जिस घर बेटी जन्म न लेती, वह घर सभ्य नहीं होता
बेटी के आरतिए के बिन, पावन यज्ञ नहीं होता है.
यज्ञ   बिना बादल रुठेंगे, सूखेगी वर्षा की रिमझिम
बेटी की पायल के स्वर बिन, सावन-सावन नहीं रहेगा

आँगन-आँगन नहीं रहेगा, आँगन-आँगन नहीं रहेगा

जिस घर बेटी जन्म न लेती, उस घर कलियाँ झर जाती हैं.
खुशबु निर्वासित हो जाती ,गोपी गीत नहीं गाती हैं.
गीत बिना बंशी चुप होगी, कान्हा नाच नहीं पायेगा.
बिन राधा के रस न होगा, मधुबन मधुबन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन  नहीं रहेगा
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उस घर घड़े रीत जाते हैं
अन्नपूर्ण अन्न न देती, दुरभिक्षों के दिन आते हैं
बिन बेटी के भोर अलूणी,थका थका दिन साँझ बिहूणी
बेटी बिना न रोटी होगी, प्राशन प्राशन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन  नहीं रहेगा
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसको लक्ष्मी कभी न वरती
भव सागर के भंवर जाल में, उसकी नौका कभी न  तरती
बेटी के आशीषों में ही, बैकुंठों का बासा होता
बेटी के बिन किसी भाल का, चन्दन चन्दन नही रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन  नहीं रहेगा
जिस घर बेटी जन्म न लेती, राखी का त्यौहार न होगा
बिना रक्षा बंधन भैया का, ममतामय संसार न होगा
भाषा का पहला सवार बेटी, शब्द शब्द में आखर बेटी
बिन बेटी के जगत न होगा, सर्जन सर्जन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन  नहीं रहेगा
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसका निष्फल हर आयोजन
सब रिश्ते नीरस हो जाते, अर्थहीन सारे संबोधन
मिलना-जुलना आना-जाना, यह समाज का ताना बाना
बिन बेटी कैसे अभिवादन, वंदन वंदन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन  नहीं रहेगा

NH-30 सड़क गंगा की सैर

 

COMMENTS :

30 टिप्पणियाँ to “बेटी की किलकारी — श्रुति का जन्म दिन—–ललित शर्मा”

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ६:०३ पूर्वाह्न 
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसका निष्फल हर आयोजन
सब रिश्ते नीरस हो जाते, अर्थहीन सारे संबोधन
जी हाँ ..सच है….
जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनायें बिटिया को..

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ६:२५ पूर्वाह्न 
शुभकामनाएँ

मदन शर्मा ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ६:४४ पूर्वाह्न 
देश के कार्य में अति व्यस्त होने के कारण एक लम्बे अंतराल के बाद आप के ब्लाग पे आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ

बिन बेटी कैसे अभिवादन, वंदन वंदन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन नहीं रहेगा

वाहबहुत सुंदर रचना.!!!!!!
आपका बहुत बहुत आभार!!

भारतीय नागरिक – Indian Citizen ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ६:५१ पूर्वाह्न 
कविता की एक एक पंक्ति बढ़िया है और सही है. जन्मदिन की बधाई…

वाणी गीत ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ७:२३ पूर्वाह्न 
यह तो सच है कि बेटियां घर की रौनक होती हैं!
प्रेरक गीत !
श्रुति को जन्मदिन की बहुत शुभकामनयें और आशीष!

: केवल राम : ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ७:३५ पूर्वाह्न 
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसका निष्फल हर आयोजन
सब रिश्ते नीरस हो जाते, अर्थहीन सारे संबोधन

वर्तमान स्थिति में यह पंक्तियाँ सोचने पर मजबूर करती हैं …!
श्रुतिप्रिया जी को जम्दीन कि हार्दिक बधाई …..!

Ratan Singh Shekhawat ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ७:४५ पूर्वाह्न 
जिसने भी इस कविता की रचना कि शानदार की|

way4host

-सर्जना शर्मा- ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ८:१६ पूर्वाह्न 
श्रुति के जन्म दिन पर बहुत बहुत बधाई ष कविता जिसने भी लिखी बहुत सुंदर ही भावविभोर कर देने वाली है । खानदान की रौनक लड़की, खानदान की इज्ज़त लड़की लेकिन जब वो पैदा होती क्यों मातम सा छा जाता है । क्यों मुखड़ा कुम्लाह जाता है । दिल से बेटियों का स्वागत करने की ज़रूरत है ।

Archana ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ८:४४ पूर्वाह्न 
बहुत अच्छी रचना…बेटी अब विदा होने वाली है ..मन भर आया है पढ़्कर…
श्रुतिप्रिया को आशीष व जन्मदिन की बधाई …

सतीश सक्सेना ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ९:२१ पूर्वाह्न 
सस्नेह आशीर्वाद बिटिया के लिए ….

संगीता पुरी ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ९:४० पूर्वाह्न 
बहुत सुंदर कविता .. बिटिया को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं !!

संध्या शर्मा ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १०:१५ पूर्वाह्न 
बिन बेटी के जगत न होगा, सर्जन सर्जन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन नहीं रहेगा …
सबसे पहले तो श्रुति के जन्म दिन पर बहुत बहुत शुभकामनायें और ढेर सारा स्नेह…
ये कविता जिन्होंने भी लिखी है, बहुत अच्छी लिखी है.. भावुक कर दिया इस रचना ने.. बेटियां होती ही ऐसी हैं…

Surendra Singh Bhamboo ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १०:२० पूर्वाह्न 
बिटिया को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं
बहुत सुंदर कविता

दर्शन कौर’ दर्शी ‘ ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ११:३० पूर्वाह्न 
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसका निष्फल हर आयोजन
सब रिश्ते नीरस हो जाते, अर्थहीन सारे संबोधन
मिलना-जुलना आना-जाना, यह समाज का ताना बाना
बिन बेटी कैसे अभिवादन, वंदन वंदन नहीं रहेगा
आँगन आँगन नहीं रहेगा, आँगन आँगन नहीं रहेगा

बेटियां हर घर की रौनक होती हैं जहाँ बेटियां नहीं होती वो घर, घर नहीं होता ? जब विदा होकर वो दुसरे घर जाती हैं तो इस घर के साथ -साथ वो उस घर को भी गुलजार करती हैं ..

असमय बेटी का बिछोह एक भुक्त भोगी ही जान सकता हैं…?

दीपक बाबा ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ११:३७ पूर्वाह्न 
जिस घर बेटी जन्म न लेती, उसका निष्फल हर आयोजन
सब रिश्ते नीरस हो जाते, अर्थहीन सारे संबोधन

नारायण भूषणिया ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १२:१० अपराह्न 
बड़े पुन्य से घर में बेटी का जन्म होता है.श्रुतिप्रिया को जन्म दिन की अशेष शुभकामनाएं – आशीर्वाद .
नारायण भूषणिया

anu ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १२:४९ अपराह्न 
बेटी श्रुति को जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई …

बेटियों पर मेरी एक छोटी सी कविता

अजन्मी बच्ची की पुकार ………
ओह माँ ..क्यूँ तू ही मेरी दुश्मन बनी
क्यूँ तू खुद को ही मारने चली …
किया तुने एक घर को रोशन
माँ तुम्हारी ने …
एक बंश बेल को बढने दिया …
फिर क्यूँ ….
तुमने मेरी बलि दे डाली ??
क्यों नहीं सुनी तुमने
अपने दिल की आवाज़
ओह माँ … माँ
क्यूँ तूने मुझे जन्म
नहीं लेने दिया…
(.अनु..)

Suresh kumar ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १:०४ अपराह्न 
बहुत सुंदर और लाजवाब कविता .. बिटिया को जन्म दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं !!

डॉ टी एस दराल ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १:११ अपराह्न 
किसी ने कहा था –जिस घर में बेटी नहीं , वह घर घर नहीं शमशान है .
न भी हो , लेकिन बिन बेटी घर में रौनक भी नहीं होती .

श्रुतिप्रिया बिटिया को जन्मदिन की बहुत बधाई और शुभकामनायें .

प्रवीण पाण्डेय ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ २:२५ अपराह्न 
बहुत ही आत्मीय अभिव्यक्ति। बिटिया को शुभकामनायें।

Apanatva ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ३:०३ अपराह्न 
आशीर्वाद बिटिया के लिए ….
बहुत सुंदर कविता

रेखा ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ३:२९ अपराह्न 
श्रुति को जन्मदिन की ढेर सारी बधाई …..

Er. सत्यम शिवम ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ३:३५ अपराह्न 
many many happy returns of the day dear shruti:)

S.M.HABIB (Sanjay Mishra ‘Habib’) ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ४:५२ अपराह्न 
बहुत सुन्दर कविता….
श्रुति को जन्म दिन की सप्रेम बधाई….

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ ७:४८ अपराह्न 
बिटिया को जन्मदिन के ढेरों आशीष!!
कविता के लिए धन्यवाद.. कविता दिल को छूती है, झकझोरती है, सवाल पूछती है!!

अशोक बजाज ने कहा… 

on 

 २५ अगस्त २०११ १०:४८ अपराह्न 
बेटियां तो हर घर की शान होती है ,
बेटियां तो खुशियों की खान होती है ,
बेटियां तो नूर-ए-जहान होती है ;
जन्म से पहले इन्हें मत मरो ,
बेटियां ईश्वर की वरदान होती है ;

श्रुतिप्रिया को जन्म दिन की बधाई एवं शुभकामनाएं !

डॉ.मीनाक्षी स्वामी ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ १०:५३ अपराह्न 
प्रिय श्रुतिप्रिया को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं । भावपूर्ण कविता !

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा… 

on 

 २६ अगस्त २०११ ११:०७ अपराह्न 
प्रिय श्रुतिप्रिया को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं, शुभाशीष्।
विलंब शुभकामना के लिये खेद! क्या होगा हमारे स्वास्थ्य का। फिर घेर लिया है सर्दी खांसी हरारत्……पहुंचा हूं आज और कुछ घंटे पहले

Atul Shrivastava ने कहा… 

on 

 २७ अगस्त २०११ ११:०३ अपराह्न 
बिटिया को जन्‍मदिन की शुभकामनाएं…………..

Swarajya karun ने कहा… 

on 

 २८ अगस्त २०११ १०:१२ अपराह्न 
बिटिया को बहुत-बहुत आशीर्वाद. अज्ञात कवि की ह्रदयस्पर्शी कविता की सार्थक प्रस्तुति के लिए आभार.

Read More: http://lalitdotcom.blogspot.com/2011/08/blog-post_25.html

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