>संरक्षण कार्य पूर्ण – मदकू द्वीप से लौटकर – ललित शर्मा

जून 22, 2011 at 11:48 अपराह्न टिप्पणी करे

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11 मई को मदकू द्वीप की यात्रा की थी और इस पर मदकू द्वीप! प्राचीन एतिहासिक स्थल –भाग -1 तथा मदकू द्वीप की यात्रा और ऐतिहासिक तथ्यों से परिचय एवं चित्रों में मदकू द्वीप की सैर नामक तीन पोस्ट भी लगाई थी। ठीक एक महीने बाद 10 जून को मेरा पुन: मदकू द्वीप जाना हुआ। वहाँ पुरातत्वविद् अरुणकुमार शर्मा जी एवं उत्खनन निर्देशक प्रभात सिंह से मुलाकात हुई। संरक्षण एवं पुनर्संरचना का कार्य पूर्णता पर है। पिछली भेंट में शर्मा जी ने बताया थाकि उत्खनन स्थल की बारिश एवं धूप से सूरक्षा के लिए डोम बनाने का कार्य प्रारंभ होने वाला है। अब उन्होने कहा कि डोम बनाने का कार्य लालफ़ीताशाही की भेंट चढ गया। बरसात आने वाली है और कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। उत्खनन स्थल पर पानी भी भर सकता है, जिससे पुरातात्विक सामग्री को नुकसान हो सकता है।
पश्चिम मुखी बड़े मंदिर के सामने हम लोग
अरुण शर्मा जी ने बताया कि यहाँ के मंदिरों को कई राजाओं ने अपने शासन काल में बनवाया है। यह मंदिर एक कतार में सीढी दार बने हैं, मुख्य मंदिर से इनकी उंचाई कम होते चली गयी। इसका कारण यह है कि राजा अपने पुर्वजों का सम्मान करते हुए उनके बनाए मंदिर से कम उंचाई में अगला मंदिर बनवाते थे। इससे मंदिर एक श्रृंखला में सीढी दार बने हैं। मंदिरों के निर्माण में पुर्वजों का सम्मान रखने की अद्भूत परम्परा की मुझे नयी जानकारी मिली। नहीं तो दो भाईयों में विवाद होने पर निर्माण की उंचाई बढते ही जाती है। कुछ दिन पहले संस्कृति मंत्री ने स्थल  का निरीक्षण किया था और अधिकारियों को किसी भी मद से डोम बनाने के लिए निर्देश दिया था। देखते हैं अब कब तक यहाँ डोम का निर्माण होता है।
 
संरक्षण एवं पुनर्संरचना

पिछली बार मैं जिस रास्ते से गया था, वह रास्ता अब बंद हो चुका है। मैं बड़ी मुस्किल से मदकू द्वीप पहुंचा। सड़क एवं पुलिया निर्माण के कारण कड़ार और कोतमी वाला मार्ग अवरुद्ध है। एक बरसात के बाद तो वहां से चक्के की गाड़ी निकलना संभव नहीं।  मुझे इस रास्ते से जाने में अधिक समय और कठिनाई का सामना करना पड़ा। 5 किलो मीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ा। वापसी में मदकूद्वीप के पश्चिम वाला एनीकेट बन गया है। उसी रास्ते से मदकू गाँव और खोलवा होते हुए आया। पक्की सड़क है, अब जाना है तो यही मार्ग श्रेष्ठ है। अगर एनीकट पर शिवनाथ का पानी नहीं चढा हो तो चार चक्के की गाड़ी आराम से पार हो सकती है। अब मैने मदकू द्वीप जाने के सभी रास्ते देख लिए। कुछ चित्र पुनर्संरचना के भी लिए। आपके लिए प्रस्तूत हैं।

वो देखिए उधर भी कुछ मिला है- अरुण शर्मा जी
संरक्षण कार्य प्रारंभ है
जलेश्वर महादेव का मंदिर-युगल मंदिर में से एक
मंदिर के बगल से उत्खनन स्थल का चित्र
प्राचीन यज्ञशाला के अवशेष

उत्खनन में प्राप्त 4 फ़ीट उंचाई का शिवलिंग
उत्खनन में प्राप्त एक मुर्ति

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